राजस्थान में काजरी और आफरी कृषि के लिए बने वरदान; पेश किया समन्वित कृषि मॉडल

राजस्थान में काजरी और आफरी कृषि के लिए बने वरदान; पेश किया समन्वित कृषि मॉडल

Kajari and Afri have become a boon for agriculture in Rajasthan

Kajari and Afri have become a boon for agriculture in Rajasthan

काजरी प्रमुख ने कहा किसानों की आय दोगुनी करने में काजरी निभा रहा है महत्वपूर्ण भूमिका

अर्थ प्रकाश आदित्य शर्म
चंडीगढ़/जोधपुर, 9 मार्च।
मृदा संरक्षण के तहत आफरी द्वारा राजस्थान, गुजरात एवं दादरा और नगर हवेली क्षेत्र के लिए वन मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए हैं। यह जानकारी केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (काजरी)  निदेशक डॉ. सुरेशपाल सिंह तंवर ने एक विशेष वार्ता के दौरान दी। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी), चंडीगढ़ के एक प्रतिनिधिमंडल के दौरे पर उन्होंने कहा कि काजरी थार मरुस्थल एवं लेह जैसे ठंडे रेगिस्तानी क्षेत्रों में कृषि के विकास के लिए कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि काजरी द्वारा विकसित नवीन तकनीकों के माध्यम से विभिन्न फसलों की उन्नत पैदावार हो रही है। इसके माध्यम से किसानों को अपनी कृषि आय बढ़ाने में सहायता मिल रही है और किसान काजरी से प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं, जिससे स्वरोजगार के साथ-साथ उद्यमियों का कौशल विकास भी हो रहा है। संस्थान ने टिब्बा स्थिरीकरण, प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन, जल प्रबंधन, फलोद्यानिकी, पशुपालन आदि क्षेत्रों में शोध कार्य कर अनेक तकनीकियाँ विकसित की हैं और इन तकनीकों को गांवों और ढाणियों तक पहुँचाया है, जिससे क्षेत्र में कृषि उत्पादन बढ़ा और हरियाली का विस्तार हुआ है। काजरी के कृषि वैज्ञानिक एआई आधारित खेती, स्मार्ट जल प्रबंधन और टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर भी कार्य कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य फसल उत्पादन बढ़ाना और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करना है।

कम पानी, कम लागत से उत्पादन वृद्धि

सुरेशपाल ने कहा कि कम पानी, कम लागत और कम खर्च में पनपने वाली खरीफ एवं रबी की विभिन्न फसलों की किस्में विकसित की गई हैं, जिससे उत्पादन में वृद्धि हुई है और किसानों की आय बढ़ी है। उन्होंने कहा कि समन्वित कृषि प्रणाली का एक मॉडल विकसित किया गया है, जिसमें अनाज, फल, चारा, पेड़, औषधीय पौधे आदि के माध्यम से किसान को वर्ष भर आय प्राप्त होती रहती है।

दोगुनी आय का लक्ष्य

प्रधानमंत्री के किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य को प्राप्त करने में काजरी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। तंवर ने कहा कि मोटे अनाज की ख्याति को वैश्विक स्तर पर बढ़ाने के लिए काजरी मिलेट्स से विभिन्न उत्पाद जैसे बाजरा बिस्किट, कुरकुरे और चॉकलेट सहित अन्य उत्पाद तैयार कर रहा है। इसके साथ ही संस्थान की प्रयोगशाला में विभिन्न राज्यों से आने वाले उद्यमियों को अपने स्टार्टअप स्थापित करने के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इससे किसानों की आय में वृद्धि होने के साथ-साथ कौशल विकास के माध्यम से उनके जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव आ रहा है।

वैकल्पिक चारा मॉडल, उन्नत किस्मों के बीज उत्पादन

शोध उपलब्धियों और गतिविधियों के बारे में बताते हुए वैकल्पिक चारा मॉडल, उन्नत किस्मों के बीज उत्पादन, फसल वाटिका, पोषण तथा पशु आहार से संबंधित कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्थान के एटिक केंद्र के माध्यम से किसानों को स्वस्थ एवं गुणवत्तापूर्ण पेड़-पौधे, बीज आदि उपलब्ध कराए जाते हैं।

काजरी के प्रधान वैज्ञानिक पी. आर. मेघवाल ने शुष्क क्षेत्र की बागवानी फसलों जैसे बेर, आंवला, अनार और खजूर की खेती के बारे में जानकारी प्रदान की। काजरी के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सुरेंद्र पुनिया ने सौर ऊर्जा के विभिन्न संयंत्रों तथा एग्रो-वोल्टाइक प्रणाली के बारे में जानकारी दी, जिसके माध्यम से एक ही भूमि से बिजली, पानी और फसल उत्पादन संभव हो रहा है। वैज्ञानिक डॉ. राजशेखर ने बाजरा एवं अन्य मोटे अनाज से बिस्कुट और कुरकुरे बनाने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी।

आफरी का दौरा: मरुस्थलीकरण को रोकने के लिए महत्वपूर्ण पहल 

Kajari and Afri have become a boon for agriculture in Rajasthan

प्रतिनिधिमंडल ने शुष्क वन अनुसंधान संस्थान (आफरी) का भी दौरा किया। इस अवसर पर आफरी के निदेशक डॉ. आशुतोष कुमार त्रिपाठी ने बताया कि आफरी वनों के संरक्षण और विस्तार के लिए विभिन्न कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि राजस्थान के ग्रामीण क्षेत्रों में भी वनों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ रही है और लोग इसके लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रहे हैं। मरुस्थलीकरण को रोकने के लिए भी आफरी कई महत्वपूर्ण पहल कर रहा है। उन्होंने बताया कि आफरी विभिन्न अनुसंधान गतिविधियों के माध्यम से नई तकनीकों का उपयोग कर वन संरक्षण और विकास के कार्यों को आगे बढ़ा रहा है।

आफरी के वरिष्ठ वैज्ञानिक ‘जी’ डॉ. तरुण कांत ने पीआईबी के पत्रकार प्रतिनिधिमंडल को संस्थान की गतिविधियों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि आफरी द्वारा वृक्ष सुधार कार्यक्रम के तहत उत्तम गुणवत्ता के शीशम क्लोन विकसित किए गए हैं। उन्होंने खेजड़ी वृक्ष की मृत्यता पर आफरी द्वारा किए गए अनुसंधान एवं उसके समाधान के बारे में भी जानकारी दी। साथ ही अवक्रमित पहाड़ियों के पुनर्वास, लवणीय भूमि के पुनर्वास और टिब्बा स्थिरीकरण के क्षेत्र में आफरी द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों के बारे में भी अवगत कराया।

भारतीय वन सेवा के अधिकारी रमेश विश्नोई ने मंच संचालन करते हुए विभाग की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी दी। पत्रकार दल ने काजरी और आफरी के विभिन्न शोध क्षेत्रों का भ्रमण किया तथा वैज्ञानिकों से कृषि तकनीकों और नवाचारों के बारे में जानकारी प्राप्त की। अंत में मीडिया एवं संचार अधिकारी आशीष वर्मा और अहमद खान ने संस्थानों के निदेशक एवं समस्त स्टाफ का धन्यवाद ज्ञापित किया।